Ganesh ji ki aarti (गणेश जी की आरती – Ganesh ji ki Aarti in Hindi )

नमस्कार दोस्तों, हमारी साइट webguideanyplace.com पर आपका स्वागत है। इस लेख में हमने  Ganesh ji ki aarti  लिखी। गणेश जी की आरती की लंबाई लगभग 400 शब्द है। हम आशा करते हैं कि आप इस लेख का उतना ही आनंद लेंगे, जितना कि हम आपको इसे प्रस्तुत करने का आनंद लेंगे। यदि आपका कोई प्रश्न या टिप्पणी है, तो कृपया नीचे टिप्पणी करने में संकोच न करें।

                             श्री गणेश जी की आरती

ganesh ji ki aarti

 

Ganesh ji ki aarti : भगवान् श्री गणेश सभी देवो में अग्रज हैं और किसी भी शुभ कार्य की शरुवात करने से पहले लम्बोदर श्री गणेश जी का पूजन हिन्दू धर्म में किया जाता हैं। जैसे भगवान् को प्रसन्न करने के लिए पूजा की जाती हैं वैसे ही भगवान् की आरती करने का भी प्रावधान हैं. Ganesh ji ki aarti करके बप्पा को खुश किया जा सकता हैं

जो भक्त सच्चे मन से Ganesh ji aarti गाता हैं उस पर श्री गणेश जी की कृपा सदा बनी रहती हैं

Ganesh ji ki aarti hindi : क्या आप जानते हैं की ganesh ji ki aarti hindi के अलावा और भी बहुत सारी भाषा में गायी जाती हैं . जैसा की आप सभी जानते हैं की भारत में अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं और यहाँ अनेको क्षेत्रीय भाषाएं हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं हैं की यहाँ भगवान् की आरती भी अलग अलग की जाती हैं। लोगों ने अपनी आवश्यकता के अनुशार ganesh ji ki aarti का अनुवाद अपनी भाषा में कर लिया हैं जैसे ganesh ji ki aarti in hindi , ganesh ji ki aarti in marathi , आदि लेकिन सबका सारांश एक ही हैं

Ganesh ji ki Aarti 1st

                         // Shri Ganesh ji ki Aarti  //

                                            ( श्री गणेश जी की आरती )

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा .
माता जाकी पारवती, पिता महादेवा ..

एकदन्त, दयावन्त, चारभुजाधारी,
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी .
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा ..

अंधे को आँख देत, कोढ़िन को काया,
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया .
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ..

ganesh ji aarti

                               //  Ganesh Ji ki Aarti Lyrics  //

(ganesh ji aarti lyrics)

Jai Ganesh, jai Ganesh, jai Ganesh deva
Mata jaki Parvati, pita Mahadeva.

Ek dant dayavant, char bhuja dhari
Mathe par tilak sohe, muse ki savari
Pan chadhe, phul chadhe, aur chadhe meva
Ladduan ka bhog lage, sant kare seva.

Mata jaki Parvati, pita Mahadeva…

Andhan ko ankh det, kodhin ko kaya
Banjhan ko putra det, nirdhan ko maya
Surya shaam sharan aye, safal kije seva.

Jai Ganesh, jai Ganesh, jai Ganesh deva,
Mata jaki Parvati, Pita Mahadeva…

                      //  Ganesh Ji ki Aarti Lyrics in English //

                    // English Translation of the Ganesh Aarti //

Glory to you, O Lord Ganesha!
Born of Parvati, daughter of the Himalayas, and the great Shiva.

O Lord of compassion, you have a single tusk, four arms,
A vermilion mark of on your forehead, and ride on a mouse.
People offer you betel leaves, blossoms, fruits
And sweets, while saints and seers worship you.

Glory to you, O Lord Ganesha!

Born of Parvati, daughter of the Himalayas, and the great Shiva.

You bestow vision on the blind, chastened body on the leprous,
Children on the sterile, and wealth on the destitute.
We pray to thee day and night, please bestow success upon us.

Glory to you, O Lord Ganesha!
Born of Parvati, daughter of the Himalayas, and the great Shiva.

Ganesh ji ki Aarti 2nd

                         Ganesh ji ki aarti in marathi

aarthi in marathi

 

            ।।  Ganesh ji ki aarti sukhkarta dukhaharta ।।

।। श्री गणेशाय नमः ।।

सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची |

नुरवी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची |

सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची |

कंठी झळके माळ मुक्ताफळाची || १ ||

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती |

दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ||

रत्नखचित फरा तूज गौरीकुमरा |

चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा |

हिरे जडित मुकुट शोभतो बरा |

रुणझुणती नुपुरे चरणी घागरिया || 2 ||

लंबोदर पितांबर फनी वरवंदना |

सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना |

दास रामाचा वाट पाहे सदना |

संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवंदना |

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती |

दर्शनमात्रे मनकामना पुरती || ३ ||

।। श्री गणेशाय नमः ।।

ganesh ji ki aarti sukh harta

       Ganesh ji ki aarti in English : Sukhkarta Dukhharta

         (गणेश जी की आरती अंग्रेजी में : सुख कर्ता दुःख हर्ता )

।।Shri Ganeshay Namah।।

Sukhkarta Dukhharta Varta Vighnachi ||

Nurvi Purvi Prem Krupa Jayachi ||

Sarvangi Sundar Uti Shendurachi ||

Kanti Jhalke Mal Mukataphalaanchi..||

Jaidev Jaidev Jai Mangal Murti ||

Darshan Maatre Man: Kaamna Phurti ||

Ratnakhachit Phara Tujh Gaurikumra ||

Chandanaachi Uti Kumkumkeshara ||

Hirejadit Mukut Shobhato Bara ||

Runjhunati Nupure(2) Charani Ghagriya ||

Jaidev Jaidev Jai Mangal Murti ||

Lambodar Pitaambar Phanivarvandana ||

Saral Sond Vakratunda Trinayana ||

Das Ramacha Vat Pahe Sadana ||

Sankati Pavave Nirvani Rakshave Survarvandana ||

Jaidev Jaidev Jai Mangal Murti ||

।। Shri Ganeshay Namah : ।।

Ganesh ji ki Aarti 3rd

ganesh ji ki chalisa

श्री गणेश चालीसा (Shri Ganesha Chalisa in Hindi)

॥दोहा॥

जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल।

विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥

जय जय जय गणपति गणराजू।

मंगल भरण करण शुभ काजू ॥

॥चौपाई॥

जै गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्घि विधाता॥

वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥

राजत मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं । मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥1॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित । चरण पादुका मुनि मन राजित ॥

धनि शिवसुवन षडानन भ्राता । गौरी ललन विश्वविख्याता ॥

ऋद्घिसिद्घि तव चंवर सुधारे । मूषक वाहन सोहत द्घारे ॥

कहौ जन्म शुभकथा तुम्हारी । अति शुचि पावन मंगलकारी ॥2॥

एक समय गिरिराज कुमारी । पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी ॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा । तब पहुंच्यो तुम धरि द्घिज रुपा ॥

अतिथि जानि कै गौरि सुखारी । बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥

अति प्रसन्न है तुम वर दीन्हा । मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥3॥

मिलहि पुत्र तुहि, बुद्घि विशाला । बिना गर्भ धारण, यहि काला ॥

गणनायक, गुण ज्ञान निधाना । पूजित प्रथम, रुप भगवाना ॥

अस कहि अन्तर्धान रुप है । पलना पर बालक स्वरुप है ॥

बनि शिशु, रुदन जबहिं तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना ॥4॥

सकल मगन, सुखमंगल गावहिं । नभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥

शम्भु, उमा, बहु दान लुटावहिं । सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ॥

लखि अति आनन्द मंगल साजा । देखन भी आये शनि राजा ॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं । बालक, देखन चाहत नाहीं ॥5॥

गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो । उत्सव मोर, न शनि तुहि भायो ॥

कहन लगे शनि, मन सकुचाई । का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ॥

नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ । शनि सों बालक देखन कहाऊ ॥

पडतहिं, शनि दृग कोण प्रकाशा । बोलक सिर उड़ि गयो अकाशा ॥6॥

गिरिजा गिरीं विकल है धरणी । सो दुख दशा गयो नहीं वरणी ॥

हाहाकार मच्यो कैलाशा । शनि कीन्हो लखि सुत को नाशा ॥

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो । काटि चक्र सो गज शिर लाये ॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो । प्राण, मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ॥7॥

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे । प्रथम पूज्य बुद्घि निधि, वन दीन्हे ॥

बुद्घ परीक्षा जब शिव कीन्हा । पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ॥

चले षडानन, भरमि भुलाई। रचे बैठ तुम बुद्घि उपाई ॥

चरण मातुपितु के धर लीन्हें । तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ॥8॥

तुम्हरी महिमा बुद्घि बड़ाई । शेष सहसमुख सके न गाई ॥

मैं मतिहीन मलीन दुखारी । करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा । जग प्रयाग, ककरा, दर्वासा ॥

अब प्रभु दया दीन पर कीजै । अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै ॥9॥

॥दोहा॥ Shri Ganesha Chalisa In Hindi

श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।

नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥

सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।

पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ति गणेश ॥

ganesh ji aarti puja

गणेश आरती कैसे करें

यहां गणेश आरती करने का पारंपरिक तरीका है। आप इसका प्रतिदिन अभ्यास कर सकते हैं ताकि भगवान गणेश आप पर अपना आशीर्वाद प्रदान करें।

गणेश की मूर्ति बनाते हुए

गणेश आरती करने से पहले आपको मूर्ति को अच्छे से सजाना चाहिए। आपको मूर्ति के ऊपर रखे पुराने फूल और माला को हटा देना चाहिए। मूर्ति को साफ सुथरा बनाएं। वास्तु को रखो जिसका अर्थ है एक कपड़ा, विशेष रूप से मूर्तियों के लिए, मूर्ति के ऊपर ठीक से बनाया गया है। यह छोटे शॉल या कपड़े के बहुत महीन टुकड़े जैसा हो सकता है। आरती करने वाले को भी उचित कपड़े पहनने चाहिए। पुरुष धोती-कुर्ता पहन सकते हैं और महिलाएँ साड़ी या सलवार-कमीज पहन सकती हैं।

भगवान को वस्त्रा अर्पित करने के बाद आप अगरबत्ती (अगरबत्ती) को जला सकते हैं, तो गंध आरती (प्रार्थना) का वातावरण बनाना शुरू कर देगी। इसके बाद आपको मूर्ति के माथे पर चंदन (चंदन का लेप) या कोई अन्य तिलक लगाना चाहिए। मूर्ति के चारों ओर माला और फूल डालें और दुर्वा (भगवान गणेश को चढ़ाया जाने वाला एक विशिष्ट प्रकार की हरी घास) चढ़ाएं। मोदक की एक प्लेट (भगवान गणेश की पसंदीदा मिठाई) या मूर्ति के सामने कोई भी अन्य मिठाई रखें।

आरती की तैयारी 

हमेशा अपनी थाली के बीच में लाल स्वास्तिक (पवित्र हिंदू चिन्ह) रखें और उस पर आरती दीपक (तेल का दीपक) रखें। आरती के माध्यम से न केवल एक दीपक (तेल का दीपक) का उपयोग किया जाता है, बल्कि अन्य चीजें जैसे, ढोप (कपूर) आदि भी मूर्ति को अर्पित की जाती हैं। हो सके तो दीपक में शुद्ध घी का प्रयोग करें।

गणेश आरती शुरू 

जब सभी लोग एकत्रित हो जाएं, तो आरती शुरू करें और कहें कि गणेश चतुर्थी का नारा ‘गणपति बप्पा मोरया’ है। आरती थली को अपने दाहिने हाथ में और अपने बाएं हाथ में घंटी बांधें। जब हर कोई आरती का पाठ करना शुरू कर देता है तो आप घड़ी की गति में मूर्ति के सामने आरती थली हिलाना शुरू कर सकते हैं और घंटी हिला सकते हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भक्तों की प्रार्थना के बारे में उन्हें सतर्क करने के लिए भगवान के सामने घंटी बजाई जाती है।

आरती की शुरुआत सुखकार्य दुखाचार ’या जय गणेश, जय गणेश’ से की जा सकती है। इन आरतियों का पालन भगवान शंकर, देवी दुर्गा आदि के लिए अन्य आरती द्वारा किया जा सकता है। आप आरती करते समय दूसरों को तबला और हारमोनियम बजाने के लिए कह सकते हैं। जब आप आरती करते हैं, तो हर किसी को आरती करते समय ताली बजानी चाहिए। ताली बजाते हुए भगवान का गुणगान करते हुए भक्तों के आनंद का प्रतीक है।

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